Chai Ka Pyala

by Satish Nangia

Overview:

‘चाय का प्याला’ “The cup of Tea” कॉलेज से एक प्रेरणात्मक प्रयत्न का पूर्ण होना है। कहते हैं ये भगवान की ही देन होती है, मैं नहीं मानता, प्रतिभा कहीं न कहीं किसी न किसी रूप में, हर व्यक्ति में छुपी रहती है। चाकू यदि काटता रहे तो तेज रहता है अन्यथा भौंडा हो जाता है।


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Book synopsis/description:

‘चाय का प्याला’ “The cup of Tea” कॉलेज से एक प्रेरणात्मक प्रयत्न का पूर्ण होना है।
कहते हैं ये भगवान की ही देन होती है, मैं नहीं मानता, प्रतिभा कहीं न कहीं किसी न किसी रूप में, हर व्यक्ति में छुपी रहती है। चाकू यदि काटता रहे तो तेज रहता है अन्यथा भौंडा हो जाता है।


About the author:

बचपन से लिखने का शौक, दाल रोटी का चक्कर, भारत वर्ष में कवि बनना और फिर जीविका चलाना बहुत मुश्किल है। ‘सार्थक कविताओं की तलाश’ में एक कविता, कहीं छोटे-मोटे लेख और “कुछ पल जीवन के...” कुछ ने पढ़ी पर कुछ अभी भी हिंदी पर या पढ़ने पर पैसे खर्चने से कतराते हैं! प्रयास चलता रहेगा....।

Other details:

ISBN 9789385523670
Category Poetry
Language Hindi
Edition First
Published in 2016
Publisher CinnamonTeal Publishing
Condition Brand New
Pages 114
Width 5.83 inches
Height 8.27 inches
Tags satish nangia , Chai Ka Pyala , The Cup Of Tea , Kuch pal Jeevan Ke

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